कौन नंबर वन सचिन या ब्रेडमन

संजय श्रीवास्तव
पिछले दिनों सचिन पर एक किताब आई। सचिन तेंदुलकर पर बहुत सी किताबें आ चुकी हैं। लेकिन ये किताब थोड़ी अलग थी। इस किताब में ये देखने की कोशिश की गई कि दो अलग अलग दौर के महान बल्लेबाज सचिन तंेदुलकर और आस्ट्रेलिया के डान ब्रेडमन में कौन महान है। सचिन की जबरदस्त उपलब्धियों  और उनकी असाधारण खेल की ऊंचाइयों के बाद से दोनों महानतम खिलाडिय़ों में तुलना होती रही है। पिछले दिनों एक सर्वे भी हुआ, जिसमें सचिन को हर पहलू के लिहाज से ब्रेडमन से बेहतर बताया गया।
सच कहा जाए तो ब्रेडमन दौर का अंत करीब छह दशक पहले हो चुका है। सचिन मौजूदा आधुनिक दौर के क्रिकेटर हैं. तब से अब तक न केवल क्रिकेट बदली है बल्कि इस खेल की चुनौतियां, दबाव, अपेक्षाएं और व्यावसायिक पक्ष सभी कुछ बदल चुके हैं.
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हालांकि कुछ मामलों में ब्रेडमन सचिन से बहुत आगे लगते हैं। लेकिन जिस दौर में वह खेले। जितनी क्रिकेट खेली और जिस तरह के गेंदबाजों और टीमों का सामना किया, उस लिहाज से सचिन कहीं ज्यादा कठिन और चुनौतीपूर्ण दौर के क्रिकेटर थे। जो हमेशा 125 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं का बोझ भी अपने कंधे पर महसूस करते थे। अगर वह सालभर में औसतन 50 मैच खेलते थे तो ब्रेडमन औसतन दस मैच. इसमें कोई शक नहीं कि ब्रेडमन ज्यादा अनुकूल स्थितियों में खेले, जबकि क्रिकेट में न व्यावसायिकता का दखल था और न ही ये खेल एक उद्यम का रूप ले चुका था।
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हालांकि ये बात सही है कि क्रिकेट के 127 साल के इतिहास में ब्रेडमन को छोडक़र कोई भी क्रिकेटर 98.96 की औसत पर नहीं पहुंच सका. ब्रेडमन ने 29 टेस्ट शतक लगाए, जिसमें दस दोहरे और दो तिहरे शतक रहे। उनकी सबसे ज्यादा रनों की पारी 334 रनों की थी, जो उन्होंने 1930 में इंग्लैंड के खिलाफ हेङ्क्षडग्ले में बनाई थी। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भी उनका औसत 95.14 था। वहीं सचिन का औसत टेस्ट में 53.78 और एक दिवसीय मैचों में 44.73 था। लेकिन सचिन ने कहीं ज्यादा यानि करीब चार गुना ज्यादा मैच भी खेले हैं. उन्होंने जहां 200 टेस्ट मैचों में 15921 रन बनाए और 51 शतक लगाए वहीं एकदिवसीय क्रिकेट में 463 मैचों में 18426 रनों का शिखर खड़ा किया और 49 शतक बनाए। इस तरह आप अगर देखें तो अपने 24 साल के क्रिकेट करियर में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 663  टेस्ट और वन-डे मैच खेले, 34 हजार से ज्यादा रन बनाए। सौ शतक लगाए। अगर हम इसमें उनके प्रथम श्रेणी के मैच और आईपीएल मैच जोड़ लें तो उनके मैच 1000 के आसपास आएंगे और रनों व शतकों की संख्या काफी ज्यादा. इतने मैच और इतने सालों तक खेलने के लिए न केवल दमदार फिटनेस की जरूरत होती है बल्कि उससे भी मजबूत इच्छाशक्ति और मानसिक जीवटता की।
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हालांकि डान ब्रेडमन खुद सचिन तेंदुलकर के काफी मुरीद थे। वह अपने घर में शायद ही कभी सचिन के मैचों को देखने से चूकते रहे हों। लोग बताते हैं कि कई सालों तक उन्होंने नियमित रूप से सचिन के मैचों को देखा। उन्होंने बाद में कहा भी सचिन का खेल बिल्कुल उन्हीं के खेल की तरह है। वह उन्हें अपने खेल जीवन की याद दिलाते हैं।
आइए देखते हैं कि कुछ साल पहले हुई रायशुमारी इन दोनों महान खिलाडिय़ों के जिन पहलुओं की तुलना की गई। वो इस तरह हैं-
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                                       ब्रेडमन बनाम सचिन
कद और सफलता       59 फीसदी         63 फीसदी
एरोबिक्स क्षमता        59 फीसदी         63 फीसदी
ताकत                        65 फीसदी          67 फीसदी
गति और चुस्ती         50 फीसदी         66 फीसदी
लचीलापन                 68 फीसदी         65 फीसदी
फुर्ती                          63 फीसदी          65 फीसदी
संतुलन                    67 फीसदी          67 फीसदी
रिएक्शन टाइम        65 फीसदी          70 फीसदी
टैक्टिकल क्षमता      67 फीसदी         72 फीसदी
समर्पण                    52 फीसदी          62 फीसदी
दबाव में क्षमता        67 फीसदी         65 फीसदी
तकनीक                   64 फीसदी         68 फीसदी
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(ये आंकड़ें एक आस्ट्रेलियाई वेबसाइट द्वारा कुछ प्रसिद्ध खिलाडिय़ों की महान प्रतिद्वंद्विताओं का आकलन करने के लिए रायशुमारी के जरिए जुटाये गये थे। जिसमें लोगों की राय के मुताबिक ही इसे इस तरह आंकडाबद्ध किया गया।
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तथ्य ये भी: सचिन की लंबाई पांच फुट पांच इंच है जबकि ब्रेडमन की कद पांच फुट सात इंच था। इस तरह अंदाज लगाया जा सकता है कि लंबाई क्रिकेट जैसे खेल में ज्यादा मायने नहीं रखती। लारा, रोहन कन्हाई, विश्वनाथ, सुनील गावस्कर जैसे महान बल्लेबाज कम लंबाई वाले ही थे. सचिन का छोटा कद वास्तव में उनके संतुलन और स्थातित्व में सहायक ही साबित होता रहा है.
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सचिन का वजन आमतौर पर 60 किलो के आसपास रहता आया है, ब्रेडमन के खेल के दिनों के वजन के बारे में पता नहीं चल पाया लेकिन दोनों ही ओवरवेट नहीं रहे हैं.
फिजिकल फिटनेस: हालांकि माना जाता है कि ब्रेडमन अपने जमाने के फिट खिलाडिय़ों में रहे हैं लेकिन एक बात उन्हें सचिन से अलग करती है। ब्रेडमन सिगार के बेहद शौकिन थे। ये बात खेल में हर कोई जानता है कि स्मोकिंग खिलाडिय़ों की क्षमता को कम करता है। सचिन किसी भी तरह की स्मोकिंग नहीं करते, लिहाजा इस मोर्चे पर वह निश्चित तौर पर ब्रेडमन से बीस ही होंगे।
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मनोवैज्ञानिक स्थिति: सर्वे में इन दोनों खिलाडिय़ों की मनोवैज्ञानिक स्थिति का अंदाज सर्वे के तीन पहलुओं से निकाला गया। ये तीन पहलू थे-रिएक्शन टाइम, समर्पण और आत्मविश्वास तथा दबाव में भी बेहतर खेलने की क्षमता, इन तीन पहलुओं में दो में सचिन बढ़त पर रहे। वैसे दोनों ही खिलाडी अपने मानसिक दृढता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन ये नहीं भूलना चाहिए कि ब्रेडमन अपने करियर की आखिरी पारी में बुरी तरह नाकाम रहे, लिहाजा इस मोर्चे पर भी सचिन का पलड़ा भारी है।
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दक्षता और प्रदर्शन: सचिन का सर्वोच्च स्कोर अविजित 248 रन रहे हैं जबकि ब्रेडमन के करियर का बेस्ट 334 रनों की पारी थी। ब्रेडमन कप्तान के रूप में भी सचिन से बेहतर साबित हुए हैं, लेकिन दोनों अलग अलग युग में हुए। ब्रेडमन ने कभी 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार वाली गेंदबाजी का कभी सामना नहीं किया। सचिन ने पिछले बीस सालों में दुनिया की सभी टीमों के खिलाफ उनके विकेट पर खतरनाक गेंदबाजों का सामना किया है। अपना 50वां शतक भी उन्होंने दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजी आक्रमण के  खिलाफ ही बनाया है। जबकि ब्रेडमन के ज्यादातर टेस्ट इंग्लैंड के खिलाफ ही रहे हैं। वहीं ब्रेडमन के जमाने में वन-डे क्रिकेट नहीं था, सचिन क्रिकेट के इस संस्करण में धूम मचा रहे हैं। बेशक यहां भी कोई स्पष्ट विजेता नहीं है लेकिन बैटिंग में ब्रेडमन ज्यादा बेहतर ठहरते हैं।
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लोकप्रियता : भारत के क्रिकेट दीवानों की नजर में सचिन का दर्जा भगवान की तरह है, केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे मुल्कों में भी। वहीं ब्रेडमन को महानतम खिलाड़ी के रूप में जाना जाता है। ज्यादातर लोगों का यहीं मानना है कि लोकप्रियता के मामले में सचिन उनसे बहुत आगे हैं लेकिन सर्वकालिक हीरो रेटिंग में ब्रेडमन सचिन से आगे हैं
संजय श्रीवास्तव 
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