सूचना के अधिकार से सुलझाएं वित्तीय उलझनें

राम सिंह इन दिनों बैंक की कारस्तानी से काफी परेशान चल रहे हैं। सारे दस्तावेज जमा करने के बाद बैंक ने उनका होम लोन आवेदन रद्द कर दिया। ऐसा ही कुछ हाल श्याम लाल का है। वह बीमा पॉलिसी मैच्योर होने के बाद उसका रिटर्न लेने के लिए महीनों से परेशान हैं। बीमा कंपनी उन्हें पैसा देने में आनाकानी कर रही है। अमन के आयकर रिटर्न का मामला भी कई सालों से लटका हुआ है। ऐसे लोगों के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) रामबाण साबित हो सकता है। ऐसे लोग अगर संबंधित विभाग में आरटीआई के तरह सूचना मांगें तो विभाग को समुचित जवाब देना होगा। आरटीआई का प्रयोग सभी तरह के वित्तीय उत्पादों में होने वाली समस्याओं मसलन टैक्स रिफंड, आवासीय प्रोजेक्ट में देरी, होम लोन का निरस्तीकरण आदि को लेकर कर सकते हैं।

क्या है आरटीआई

आरटीआई अधिनियम जनहित में वर्ष २००५ में बनाया गया। इस अधिनियम के तहत कोई भी नागरिक सरकार और सरकार से सहायता प्राप्त किसी भी विभाग से सूचना मांग सकता है। आरटीआई क्षेत्र में काम करने वाले अरविंद केजरीवाल का कहना है कि इस अधिकार के तहत कोई भी सूचना की मांग कर सकता है। कानून बनने के बाद सभी विभागों में एक अधिकारी को इससे संबंधित जानकारी मुहैया करवाने के लिए नामित किया गया है। संबंधित अधिकारी मांगी गई सूचना के बारे में सारी जानकारी संबंधित व्यक्ति को उपलब्ध करवाएंगे। केजरीवाल का कहना है कि इसके लिए लोगों को कुछ शुल्क भी देना होता है। आरटीआई की खासियत यह भी है कि विभाग यह आप से नहीं पूछ सकता है कि आपने सूचना क्यों मांगी है। उदाहरण के तौर पर विजय शर्मा को ही ले सकते हैं। विजय ने बैंक के काउंटर पर जब चैक जमा की रसीद मांगी तो बैंक के मैनेजर ने रसीद देने से मना कर दिया। बस विजय ने आरटीआई� के तहत रिजर्व बैंक से ही जवाब तलब कर डाला। संबंंधित बैंक के मैनेजर को अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इस बात को लेकर जवाब देना पड़ा और उसके बाद से बैंक की शाखाओं में यह सूचना भी लिखी जाने लगी कि अगर ग्राहक चैक जमा कराने की रसीद मांगता है तो बैंक को रसीद देना होगा।

कहां फाइल करें आरटीआई

अब सवाल यह उठता है कि आरटीआई कहां पर फाइल किया जा सकता है। आरटीआई नियमानुसार सभी विभाग को आरटीआई अधिकारियों की नियुक्ति करनी होती है।आरटीआई के तहत नामित अधिकारियों को एक पदानुक्रम तैयार करना होता है। लोगों को संबंधित आरटीआई अधिकारियों के पास ही सूचना की बाबत आवेदन देना होता है। इसके लिए सूचना पाने के लिए आवेदन देने वाले लोगों को दस रुपए का शुल्क भी जमा कराना पड़ता है।

बैंक से संबंधित सूचनाएं

सभी बैंकों ने सूचना अधिकारियों की नियुक्ति आरटीआई एक्ट २००५ के तहत की है। भारतीय स्टेट बैंक के डीजीएम अखिलेश कुमार का कहना है कि बैंक ने आरटीआई से संबंधित कार्य के लिए तीन अधिकारियों की नियुक्ति की है। पहला सेंट्रल असिस्टेंट पब्लिक इंफार्मेशन ऑफिसर, सीपीआईओ और अपेलेट अथॉरिटी। कोई भी उपभोक्ता बैंक की वेबसाइट पर जाकर संबंधित जोन के सीपीआईओ और अपेलेट अधिकारियों के बारे में जानकारी इक_ा कर सकता है। आमतौर पर सीएपीआई आवेदन लेकर सीपीआईओ और अपीलेट अथॉरिटी को फारवर्ड कर देता है। यदि मांगी गई सूचना नियम के दायरे में है तो ३० दिन के भीतर उपभोक्ता को उपलब्ध करवा दिया जाता है। अगर सूचना देने लायक नहीं है तो आवेदन को निरस्त कर दिया जाता है। सीपीआईओ के फैसले के विरोध में अपेलेट में अपील की जा सकती है। अगर निजी बैंक की बाबत कोई जानकारी चाहिए तो आप आरटीआई का सहारा ले सकते हैं।

रिजर्व बैंक में आरटीआई

अगर किसी को रिजर्व बैंक से किसी सूचना की मांग करनी हो तो वह आरटीआई के सहारे इसे हासिल कर सकता है। इसके लिए निर्धारित शुल्क के साथ आवेदन करना होगा। रिजर्व बैंक के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में सूचना अधिकारी को नामित किया गया है। इसके अपेलेट अधिकारी के रूप में एक डिप्टी गवर्नर को नामित किया गया है और उनका पता है रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, अमर बिल्डिंग, प्रथम तल, सर पीएम रोड मुंबई।

बीमा से संबंधित समस्या

अगर बीमा कंपनी, बीमा मैच्योरिटी राशि देने में आनाकानी करे तो इस अधिकार को प्रयोग किया जा सकता है। अगर किसी को एलआईसी से कोई सूचना मांगनी हो तो वे संबंधित शाखा में इस बाबत आवेदन कर सकते हैं। बैंक के शााखा प्रबंधक से इस बारे में बात कर सकते हैं। एलआईसी की वेबसाइट पर जाकर क्षेत्रवार सूचना अधिकारी का नाम पता और नंबर हासिल किया जा सकता है। अगर आपको लगता है कि बीमा कंपनियां आपके मामले में समुचित जानकारी नहीं दे रही हैं तो आप इस बाबत आईआरडीए से भी जानकारी मांग सकते हैं। पता है-आईआरडीए, तीसरा तल, परिश्रम भवन, बशीर बाग, हैदराबाद- ५००००४

ईपीएफ के बारे में

पीएफ निकालने में लोगों को न जाने कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं। ईपीएफ ऑफिस में कर्मचारी और अधिकारी बात करने को तैयार नहीं होते हैं। इस स्थिति में आप सबसे पहले वहां के सूचना अधिकारी के बारे में पता करें और उसके पास आरटीआई के तहत विधिवत आवेदन देकर पीएफ लेट होने की बाबत जानकारी मांगें। अगर आवेदन पहुंचने के ३० दिन के बाद भी वहां से कोई खोज खबर नहीं लेता है तो समझे उस अधिकारी की खैर नहीं है। आप उसके बाद� संबंधित अपेलेट में एक शिकायत दायर कर सकते हैं। ईपीएफ को आपके पेमेंट मे हुई देरी की पूरी जानकारी उपलब्ध करवानी होगी और देरी की अवधि के लिए ईपीएफ को अतिरिक्त ब्याज उपलब्ध करवाना होगा।

शेयर और एमएफ का झंझट

शेयर को लेकर किसी तरह की सूचना हासिल करनी हो तो सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) से सूचना मांगी जा सकती है। सेबी की वेबसाइट से संबंधित सूचना अधिकारी के बारे में जानकारी ली जा सकती है। उसके बाद विधिवत तरीके से सूचना मांगी जा सकती है। अगर मामला म्यूचुअल फंड से संबंधित है तो भी आरटीआई उतना ही प्रभावी है। सेबी की वेबसाइट  पर इस बाबत जानकारी ली जा सकती है।

साभार-मनी मंत्र

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