जब आपकी लॉटरी लग जाए !

p v subramnayam

इंसान की किस्मत कब और कहां बदल जाए कोई नहीं जानता। बिहार के एक छोटे से गांव मेें रहने वाले सुशील कुमार ने क्या कभी सोचा था कि वे अपने जीवन काल में कभी पांच करोड़ रुपये की राशि देख भी पाएंगे? निम्न मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाला यह नौजवान कौन बनेगा करोड़पति में पांच करोड़ रुपये जीतकर असली स्लम डॉग मिलेनियर बन गया है। करोड़पति बनते ही सुशील के सपनों को पंख लग गए हैं। अब वे अपने उन सपनों को जीने की सोच सकते हैं जिसे उन्होंने आर्थिक बदहाली की वजह से दफन कर दिया था। जैसे ही लक्ष्मी ने सुशील कुमार के जीवन में दस्तक दी, कई कंपनियां उन्हें अपना ब्रांड एंबेस्डर बनने का भी ऑफर दे रही हैं। भारत सरकार ने तो उन्हें मनरेगा का चेहरा बनाने का फैसला किया है। जाहिर है सुशील अब सभी के लिए आम आदमी के दिलों में जगह बनाने का माध्यम बन चुके हैं। एक आम आदमी का रातों-रात फर्श से अर्श पर पहुंचने की दास्तां को हर कोई ललचाई नजरों से देखेगा एवं कंपनियां उन्हें आसानी से सपने बेच पाएंगी। भई, पैसे की महिमा होती भी अजीब है आपको रातों रात आम से खास बना देती है।

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कहते हैं कि देने वाला जब देता है तो छप्पड़ फाड़ कर देता है। बीते दिनों कौन बनेगा करोड़पति से चर्चित सुशील कुमार के छप्पड़ से पांच करोड़ रुपये की बरसात हुई जिसे हम सब ने टीवी के माध्यम से देखा। संभवत: इतनी बड़ी राशि जीतने के बाद पहली बात उनके दिमाग में यही आई होगी कि आखिर इन पैसों का निवेश कहां किया जाय। चलिए थोड़ी देर के लिए सुशील कुमार और उनके पांच करोड़ रुपये को भूल जाइए और जरा यह सोचिए कि यदि आपको ऐसी एक-मुश्त राशि मिले तो आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं?

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आइए, हम यह मानते हैं कि आपको भी ऐसी ही कोई पांच करोड़ रुपये की लॉटरी लग गई है जिसमें कर आदि काट-पीट कर आपके हाथ ३.५ करोड़ रुपये लगा है। सोचिए, कम से कम सोचा तो जा सकता है। फिर प्रश्न आता है कि आगे क्या?

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आगे ये सब करें

पूरी राशि को किसी अच्छे म्यूचुअल फंड के लिक्विड स्कीम में निवेश किया जाना चाहिए: ध्यान रहे कि पूरी राशि निवेश करनी है। इतनी बड़ी राशि को पाने के बाद मन में मदहोशी और उन्माद होगा और आपको सामान्य होने में समय लगेगा। कोई बात नहीं मानवीय स्वभाव से ऐसा होता है। खैर, जब तक आपकी यह मदहोशी नहीं टूटती हैै और उन्माद दम नहीं तोड़ता है, पैसों को ऐसी जगह लगाना जरूरी है जहां वो सुरक्षित रहे व बढ़ता रहे, यूं ही शिथिल नहीं पड़ा रहे। लिक्विड फंड का निवेश जोखिम मुक्त होता है और आप इस निश्चिंतता के साथ सुस्ता सकते हैं कि कम से कम आपकी राशि आपके किए गए निवेश से कम नहीं होगी। बचत खाते के जैसा इसमें जितना जरूरत हो उतनी राशि को जरूरत मुताबिक रिडीम (भुनाया) कर सकते हैं।

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प्रार्थना से करें शुरुआत : सबसे पहले भगवान से प्रार्थना कर उन्हें शुक्रिया अदा करें कि आप इतनी बड़ी राशि जीतने या पाने में सफल हुए। आप उनसे सद्बुद्धि और विवेक का आशीर्वाद मांगते हुए उनसे आगे का रास्ता सुझाने की याचना करें क्योंकि आगे रास्ते पर आपको अपने पैसों का प्रबंधन जो करना है, जो आसान काम नहीं होगा।

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ध्यान रहे, भगवान ने केवल आपको पैसा दिया है: कई लोग यह सोच लेते हैं कि, चूंकि उनको पैसा प्राप्त हो गया है इसलिए वो इसका प्रबंधन करना जानते हैं। जनाब, आपको बता दें यह कतई आसान नहीं है। आपको इसे सीखना होगा और सही सलाहकार की खोज के लिए अच्छा खासा समय लगाना होगा। यकीन मानिए सही सलाहकार की खोज के लिए समय देना और उचित सलाह के लिए पैसे खर्च करना लाभकारी सिद्ध होता है।

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कर्ज चुकाएं: चाहे ब्याज दर या लोन की अवधि कुछ भी हो आप पहले-पहल आप इस प्राप्त राशि से अपने सारे मौजूदा कर्जों को चुकता कर दें।

घर खरीदें या निर्माण करें: यहां एक चीज का ध्यान रखें। जैसे ही आपको पैसे मिलेंगे आप खुद को अमीर समझने लगेंगे और जरूरत से अधिक खर्च करने लगेंगे। किसी भी घर को पक्का करने से पहले ५-६ हफ्ते का समय लें। यह ध्यान जरूर रहे कि जमीन की लागत ऊंची होती है और उसके बाद बनाने की लागत को आंकना आसान हो जाता है। ऐसे में किसी घर की हामी भरने से पहले बुद्धि का पूरा इस्तेमाल करें।

 

प्रत्येक व्यक्ति के लिए कोष (कॉरपस) बनाएं:

प्रत्येक व्यक्ति के अलग-अलग उद्देश्य को देखते हुए रकम को अलग-अलग स्कीमों में लगाएं। उदाहरण के लिए यदि आप अपने पिता या फिर बड़े भाई के लिए पेंशन की योजना बना रहे हैं तो उनके नाम से निवेश, किसी पेंशन स्कीमों में करें। फिर यदि आपके बच्चे या फिर भतीजे-भतीजियां हैं तो उनके लिए चाइल्ड प्लान ले लें। ये सभी एक बार किया जाना वाला निवेश है और यहां बार-बार रकम डालने की जरूरत नहीं होती है।

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सही योजना का चयन करें: आपके भाई-बहन, माता-पिता, भतीजे-भतीजियों के लक्ष्य के अनुसार और इससे संबंधित समय के आधार पर ही योजना का चयन करें। यदि लक्ष्य की पूर्ति निकट है तो अधिक डेट वाली योजनाओं, जैसे एमआईपी का चयन करें वहीं यदि रिडम्पशन कम से कम ६-८ साल बाद हो तो बैलेंस्ड फंड (जैसे प्रूडेंस) का चयन करें।

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सिंगल प्रीमियम पेंशन प्लान को खरीदें:

रिटर्न के बारे में अधिक चिंता नहीं करते हुए अपने लॉटरी (राशि) के १० फीसदी हिस्से का निवेश सिंगल प्रीमियम पेंशन योजना के लिए करें। चाहे कुछ भी हो जाए, आप ऐसा जरूर करें, यह आपकी ढलती उम्र में बड़ी सेवा करेगा। हां, इसका एक बुरा पक्ष यही है कि इसका रिटर्न कमतर ही रहेगा। फिर भी यह खराब नहीं है क्योंकि यहां निवेश महंगाई दर को छोडक़र बाकी लिहाज से सुरक्षित ही रहता है।

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सभी लाभार्थियों के नाम से पब्लिक प्रोविडेंड फंड का खाता खुलवा लें: यदि आपके यहां लाभार्थियों की संख्या ज्यादा है तो पीपीएफ खाता खुलवा लें ताकि उनको पैसे की सुरक्षा भी मिल जाए और यदि वो अपने पैसों को फौरन खर्च भी करना चाहें तो ऐसा न कर सकें। आप चाहें तो राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) पर भी विचार सकते हैं जिसका इस्तेमाल ८-९ साल बाद किया जा सकता है।

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एमआईपी में एक करोड़ रुपये डाले: एमआईपी यानी मंथली इनकम प्लान के जरिए आपके निवेश का छोटा हिस्सा इक्विटी में निवेशित रहता है जबकि बड़ा हिस्सा डेट प्रतिभूतियों में लगा होता है। यह निवेश आपके रोजाना के खर्चों को पूरा करेगी।

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लिक्विड फंड से एसटीपी करें:

यदि आपने एक मुश्त राशि, मानिए एक करोड़ रुपये, लिक्विड फंड में लगा दी है तो इसी फंड से हर माह

१००००० रुपये की सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान यानी एसटीपी (जो एक करोड़ का एक फीसदी रकम है) किसी एग्रेसिव इक्विटी फंड में कर दें। इस प्रकार प्रत्येक साल आप १२ लाख रुपये का निवेश करेंगे और फिर १० से १५ साल बाद कम से कम १००००० हर महीने वापस रिटर्न के रूप में प्राप्त करेंगे जो आपका घर खर्च पूरा करेगा।

आकस्मिक पैसा आ जाने के बाद आपको क्या-क्या नहीं करना चाहिए अपने लाइफस्टाइल में बदलाव: आपका रहन-सहन इस बात पर निर्भर करना चाहिए कि आपके आय का स्तर सामान्यत: क्या रहने वाला है।

इस प्रकार आकस्मिक धनराशि के कारण आप अपने रहन-सहन का तरीका इतना न बदल दें कि कुछ साल बाद इस नए स्तर को बनाए रखने में परेशानी आने लगे। कारोबार के लिए दोस्त, रिश्तेदार, भाई-बहन और बच्चों को पैसे देना: यदि आपके निकट के लोग यह सोचते हैं कि आपकी इस लॉटरी में उनका भी हिस्सा बनता है और आपसे कारोबार के लिए इस हिस्से की मांग रखते हैं तो जनाब आप उन्हें विनम्रतापूर्वक मना कर दीजिए। जैसे कि पैसा आ जाने के बाद आप फंड मैनेजर नहीं बन गए हैं वैसे ही आपके निकट के लोग अचानक से अधिक समझदार कारोबारी नहीं बन जाएंगे। यदि वो इन पैसों को लुटा भी बैठे तो कहेंगे कि भइय्या ये तो मुफ्त का पैसा था, चला गया जहां से आया था। कई सारे सलाहकारों की सुनना: सबसे अच्छी बात यही होगी कि आप त्वरित तौर पर सभी सलाहकारों से तौबा कर लें। किसी भी निर्णय को तीन महीने के लिए टाल दें और फिर जब सभी सलाहकार दूर हो जाएं तो अपनी योजना बनाएं।

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दोस्तों को उधार देना: जीत से मिली राशि को दोस्तों में उधार रूपी बांटना मूर्खता होगी। आप इससे न केवल अपनी राशि खोएंगे बल्कि संभवत: दोस्त भी। दुनिया से बचा कर रखना: बजाय किसी राजनीतिक सुरक्षा के इतनी बड़ी राशि को बचा कर रखना आसान नहीं होगा। सावधान रहें।

 

 

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Courtesy : Money Mantra

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