पशु सुरक्षा के प्रति उदासीन बिहार

कफील इकबाल
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिहार को छोड़ कर देश के तकरीबन सभी राज्यों में स्वास्थ्य हेतु हानिकारक पॉलिथिन के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है वन एवम पर्यावरण मंत्री बिहार सरकार सुशील कुमार मोदी ने हाल ही में एक बैठक में संबंधित पदाधिकारियों पॉलिथिन उपयोग पर प्रतिबंध लगाने सम्बंधित कारवाई करने की बात कही है । एक आकड़े के अनुसार राज्य में प्रतिवर्ष 5000से अधिक मवेशी पॉलिथिन खाने से असमय मौत के शिकार हो जाते है। हजारों की संख्या में लावारिस पशु अपने पेट में जमा हुए पॉलिथिन के कारण असमय मौत के करीब पहुँच जाते हैं, पशु हिंसा के खिलाफ कार्य कर रहे एक गैर सरकारी संस्था में काम करने वाले राकेश कुमार ने बताया की हाल ही में मोतिहारी (बिहार) में किये गए एक गाय के पेट के ऑपरेशन में 25 किलो पॉलिथिन निकाला गया।
आज भी सैकड़ों की संख्या में सूजे हुए पेट के साथ आवारा पशुओं को बिहार के विभिन्न शहरों  और सभी चौक चौराहों और सड़कों पर देखा जा सकता है, राकेश कुमार ने बताया कि बाजार से सामानों कि खरीदारी के दौरान पॉलिथिन कचरे के डिब्बे में फ़ेंक दिया जाता है जो नाली या मिट्टी में हजारों साल उसी तरह जमा हुआ रहेगा जो न तो गलेगा ना सड़ेगा। पर्यावरणविद् एवं चन्दना सर्जिकेयर के संचालक डॉ. अजय कुमार ने बताया कि एक पॉलिथिन को गलने में हजारों वर्ष लगेंगे। मोतिहारी (बिहार) के चिकित्सक डॉ हामिद इकबाल के अनुसार इसका कोई बेहतर विकल्प नहीं होने एवं समाज के बड़े तबके द्वारा इसके  इस्तेमाल किये जाने से इस पर प्रतिबंध लगाना मुश्किल है, फिर भी सरकार अगर चाहे तो इसके इस्तेमाल को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विकल्प के रूप में कागज का ढोंगा और लिफाफा उपलब्ध है, लेकिन दुकानदार कहते है कि कागज के पैकेट को ग्राहक पसंद नहीं करते हैं. एक और चिकित्सक अनिल कुमार सिन्हा के अनुसार पॉलिथिन बैग को जलाकर भी खत्म नहीं किया जा सकता है जो श्वसन से संबंधित की बीमारियों कि जनक है. पॉलिथिन के कचरे से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के जनक मच्छर पैदा होते हैं इस लिए एक कठोर कानून बनाए जाने एवं इसे लागू किये जाने के बाद ही इसके हस्तान्तरण एवं इस्तेमाल पर रोक लगाया जा सकता है।
पशु अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि अज्ञानतावश पॉलिथिन खाने से मर रहे आवारा पशुओं की जानकारी तो उन्हें है, परन्तु इस सम्बन्ध में कारवाई का कोई आदेश विभाग को प्राप्त नहीं है।
पॉलिथिन बैग का विकल्प अगर नहीं ढूंढा गया तो न सिर्फ पशु बल्कि इंसान के लिए भी कई तरह की बीमारियाँ होती रहेगी। इस पर तत्काल प्रतिबंध की सम्भावना नजर नहीं आ रहा है  जो चिंता का विषय है।
(लेखक  बिहार  के वरिष्ठ पत्रकार हैं)
पर्यावरण, राज्य, विकास, विचार, शिक्षा, सामाजिक, स्वास्थ्य

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