अमेरिकी चुनाव और मुसलमान: एक सोची समझी रणनीति

आदित्य कुमार गिरि

डॉनल्ड ट्रम्प की मुस्लिम विरोधी रणनीति से भारत में भी कुछ लोग खुश हैं। यकीनन वे लोग मैच्योर तो नहीं हैं। अमेरिका ईसाई मुल्क है। वे ऐसे भी सचेत और कट्टर हैं फिर ट्रम्प यह सब क्यों और किसके लिए कर रहे हैं। आखिर उनकी इस रणनीति का सम्बन्ध किससे है ? क्या आपको यह लगता है कि ट्रम्प यह सब बिना अमेरिकी पूंजीपतियों की रज़ामन्दी के कर रहे हैं? क्या हम मुसलमानों को लेकर किसी अमेरिकी वह भी वहाँ चुनाव लड़ने वाले मुख्य दल के स्टैंड को हल्के में ले सकते हैं ? क्या इसे निर्दोष दृष्टि कह सकते हैं ?
मुसलमानों को लेकर डॉनल्ड ट्रम्प की रणनीति असल में अमेरिका की पुरानी रणनीति का ही वोकल रूप है। इसे किसी ट्रम्प की अकेली या मौलिक सोच समझने वाले भोले हैं, मासूम हैं।  अमेरिका में हथियार बनाने वाली कम्पनियाँ ट्रम्प के पीछे हैं। मुसलमानों के खिलाफ हेट स्पीच एक मानसिकता के लिए है। “मुसलमान आतंकवादी होते हैं और मेरी सरकार बनी तो इन्हें ठिकाने लगा दूंगा।“ कम से कम अमेरिकी रणनीति को आगे बढ़ाने वाला प्रेसिडेंट आ रहा है। टाइप एक समझ। एक मानसिकता। ध्यान रहे अमेरिका में पिछले दिनों एक महीने तक दंगे की सी स्थिति रही। वहाँ का ‘गरीब’ दुकानें लूटता रहा, कपड़े लूटता रहा, खाने के लिए रेस्टोरेंट्स लूटता रहा।
अभी इस ठण्ड में वहाँ बड़े पैमाने पर लोगों के मरने की ख़बरें हैं। मन्दी को दस साल होने जा रहे हैं। उसपर दुनिया भर में अमेरिका की सैनिक इंवॉल्वेमेंट ने उसकी आर्थिक कमर तोड़ दी है। अमेरिका एक सीरियस क्राइसिस की ओर बढ़ रहा है लेकिन चुनाव में मुद्दे वे सब नहीं हैं। ट्रम्प ने अपने तूफानी प्रचार से पूरे अमेरिकी चुनाव को मुसलमान, आतंकवाद, शांति और युद्ध पर केंद्रित कर दिया है। यानी चुनाव ही अमेरिका में इस मानसिकता को जन्म देने के लिए होने जा रहे हैं कि युद्ध अनिवार्य है।अमेरिका मानवता के लिए पुण्य करने जा रहा है और मुसलमान मानवता का शत्रु है। तो उसकी उपेक्षा (मुख्यधारा से समाज से मुसलमानों का बहिष्कार) और खात्मा जरूरी है।
ट्रम्प की इस मानसिकता और रणनीति को अमेरिकी मीडिया बैक कर रहा है। यह बेहद आपत्तिजनक है। अमेरिका ही नहीं दुनिया का मुसलमान इससे डरा हुआ है। यह दुनियाभर में मुसलमानों को लेकर घृणात्मक माहौल को बढ़ाएगा। मुसलमानों को केंद्र में रखकर घृणा का व्यापर होगा और इससे प्रभावित होगा आम मुसलमान। मुसलमान एक अपराधी की तरह देखा जाये फ़िलहाल इन कम्पनियों की यही कोशिश है। अमेरिका आदि देशों की यह पॉलिसी बेहद ख़तरनाक है। यह पूरी दुनिया को शांत नहीं रहने देगा।
हथियार बन रहे हैं, आतंकवादियों को बेचे जा रहे हैं और उन्हीं से युद्ध की बातें भी की जा रही हैं। जिसके खात्मे की बातें हो रही हैं, उन्हें ही हथियार भी दिए (बेचे) जा रहे हैं। और सरकारी बजट से इसके लिए पैसे निकलें, निकलते रहें इसके लिए डॉनल्ड ट्रम्प जैसे लोगों की सहायता ली जा रही है जो लगातार बता रहे हैं,बताते रहेंगे कि मुसलमान ख़तरा है और अमेरिका उसका ख़ात्मा करेगा। विश्वास कीजिये अमेरिका और आतंकवादी सङ्गठन (आईएसआईएस/अलक़ायदा/लश्कर/जैश) सभी के लिए यह मानसकिता संजीवनी(?) है।
हथियार बनाने वाली कम्पनियाँ ट्रम्प को मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। ट्रम्प अगर हार भी गए तो भी उनकी इमेज के साथ मुसलमानों के खिलाफ जो माहौल तैयार करने की कोशिशें हो रही हैं, उसमें उन्हें सफलता जरूर मिलेगी। ट्रम्प सिर्फ एक मानसिकता को जन्म देने की कड़ी हैं, मोहरे हैं। हार या जीत का इसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ट्रम्प की सहायता से जिस समझ और मानसिकता पर काम चल रहा है उसमें सफलता मिलेगी ही मिलेगी।

 

अमेरिकी मीडिया यहाँ बेहद अहम भूमिका में है। अमेरिकी प्रोग्रेसिव तबका इसके खिलाफ बोले, लिखे, सडक़ों पर उतरे यह और ज्यादा जरूरी हो गया है। अमेरिका में युद्ध विरोधी मानसिकता बने यह अब जरूरी हो जिस है। उम्मीद थी वहाँ का सोशल मीडिया एक्टिव होगा लेकिन वह भी गैर अमेरिकी जातीयता और राष्ट्रीयता के खिलाफ़ ही है। उसका अधिकतर लेखन ट्रम्प की मानसिकता का ही है।
यह केवल अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए ठीक नहीं है विश्वास कीजिये अब यह ट्रेंड की तरह दूसरे देशों में भी जायेगा, अब अमेरिका ही की तरह दूसरे देश में मुसलमानों के खिलाफ रणनीति बनाएंगे और चुनाव लड़ेंगे। असल में यह हो तो राजनीति में रहा है लेकिन इसका निशाना समाज है, सामाजिक जीवन और दृष्टि है। इससे बड़े पैमाने पर मुसलमानों के खिलाफ माहौल बनेगा और सरकारों के लिए युद्ध बजट बढ़ाने की ज़मीन भी तैयार होगी। अमेरिका की इस रणनीति को समझना और नंगा करना जरूरी है। इसलिए भी इसपर लिखना और इसके विरोध में खड़ा होना जरूरी है।
अमेरिका की सरकारें घृणा के आधार पर जो समाज विकसित करने जा रही हैं वह असल में युद्धोन्मादी समाज होगा जिसका चरित्र घृणा करने वाला और युद्ध पसन्द होगा। यह मानवता के लिए ठीक नहीं है।

 

आदित्य कुमार गिरि अतिथि प्रवक्ता, हिंदी विभाग, सेठ आनंदराम जयपुरिया कॉलेज (कलकत्ता विश्वविद्यालय)

ईमेल-adityakumargiri@gmail. com

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