राहगीरों को दिन दहाड़े लुटते टोल

प्रवीण कुमार
समय बदलता है युग बदलता है समय के साथ अपराध और अपराध करने के तरीके बदलते हैं। कभी घने जगलो में रात के समय राहगिरो को डाकु लुटा करते थे। एक पुरानी कहानी है-अंगुली माल डाकु जंगल में रहता था । उस राह से गुजरने वालो रहागिरो को लुटता था और गिनती के लिए उनके अंगुलियो की माला बना कर पहनता था। यह कहानी बहुत पुरानी है। लेकिन बुद् जब उस रास्ते से गुजरे तो वह सुधर गया है। अपने अपराध की दुनिया को सदा के लिए अलविदा कह दिया ।

आज देश में टोल नाको पर अनयमितता और भ्रष्टाचार की शिकायते आम बात हो गयी है। टोल की वसुली को लेकर लोगो में गहरी नाराजगी है। लोग चाहते है कि टोल टेक्स समाप्त हो और इसके लिए कोई सर्वसम्मत हल निकले । न्यायालय भी वर्तमान व्यवस्था पर समय समय पर अपनी नाखुशी जाहिर कर चुका है अर्थात सरकार न्यायालय और आम नागरिक तीनो चाहते है कि वर्तमान में टोल की जो स्थिती है,उसमें सुधार हो।सडको की गुणवता युक्त व्यवस्था और सुचारू परिवहन के नाम पर टोल टैक्स लागू किया गया । टोल टैक्स की वसुली के लिए स्थान स्थान पर नाके स्थिापित किये गये । इसमें अनेक कम्पनिया अनुबंधो का पालन नही कर रही है। किस टोल नाको से कितनी वसूली जाए और कितना भार आम जनता पर पड रहा है इसका कोई लेखा जोखा नही हैं।राजस्थान की जितनी मुख्य सडकें है,लगभग सभी पर टोल नाके स्थापित हैं। इनमें किशनगढ,थिकरिया, खंडी, ओबारी और कानवालियास ये ऐसे टोल रोड है जो अपना पैसा कब का वसुल चुके है, फिर भी चले जा रहे हैै। है।बुरी तरह से बिखरे फोरलेन और क्षतिग्रस्त राजमार्ग पर टोल वसुला जा रहा है।दिल्ली -जयपुर हाइवे को कई साल से चार लेन से छह लेन राजमार्ग में बदला जा रहा है। काम तय समय से काफी पीछे चल रहा है।लेकिन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआइ) के नियमो के मुताबित छह लेन का काम शुरू होते ही ठेकेदार को पूरा टोल वसूलने का अधिकार है। भले ही इस काम में रोड पहले से ज्यादा खराब हो गई हो।

एनएचआइ पूरी निष्ठा से ठेकेदार को फायदा पहुंचाने वाले इस नियम से बंधा है।लेकिन और भी बहुत से नियम है जो यात्रा करने वालो के हक में है। उन्हे एनएचआइ बडे मजे से दरकिनार कर देता है।पिछले साल 10 सितम्बर 2014 को राजस्थान हाईकोट ने टोल टैक्स बढाने के फैसले को खारिज कर चुका है। अदालत ने पूछा कि जब रोड की हालत ही खस्ता है तो टोल किस बात का बढाया जा रहा है। ठीक इसी तरह दिल्ली आगरा रोड को सिक्स लेन करने का ठेका रिलायंस इन्फ्राट्रक्चर की सहयोगी कंपनी डीए रोड प्राइवेट लिमिटेड को 26 मई 2010 को दिया गया था। 16 अक्टूबर 2012 से यहा सिक्स लेन के हिसाब से टोल वसूली शुरू भी हो गई। आज दिन तक परियोजना पूर्ण नही हुई है ,लेकिन कंपनी पैसा कमा रही है अगस्त 2013 तक कंपनी ने 120 करोड रू टोल वसूला और इस पैसे को सिक्स लेन बनाने के बजाए दूसरे कामो में लगा दिया ।

यानि टोल के नाम पर आम आदमी बेहतर रास्ते का ख्वाब ही देखता रह गया और ठेकेदार ने पैसे से पैसे बनाना शुरू कर दिया। दिल्ली नोएडा (डीएनडी) साल 2001 में 408 करोड रूपय की लागत से तैयार हुआ था लेकिन आज डीएनडी अपने बैलेंस शीट में करीब साढे तीन हजार का घाटा दिखा रही है नतीजा ये हुआ है कि आने वाले 30 साल तक टोल टैक्स वसूलने की पूरी प्लानिंग कंपनी के पास तैयार है। जबकि दोनो राज्यो ने डीएनडी को करीब 100 एकड जमीन दी जिसकी कीमत 50 हजार करोड से ज्यादा की है,उसे महज एक रूपय लीज पर दी है । पीपीपी माॅडल के तहत डीएनडी के साथ 1997 मे एग्रीमेंट हुआ था तब कई ऐसे प्रावधान बनाए गए जिसमें कंपनी के ही हितो का ध्यान रखा गया था। जिन नौकरशाहो के जिम्मे लोगो के हितो की निगरानी करना था,उन्होने कंपनी के हितो को प्राथमिकता दी।समझौते के मुताबित,कंपनी अपनी लागत यानी 408 करोड का 20 फीसदी रिफंड 10 साल तक वसूलेगी ।लेकिन अगर 20 फीसदी का रिफंड उसे नही मिला,तो टोल टैक्स वसूलने का समय भी चक्रवृद्वि व्याज की तरह बढता जाएगा। इसी समीकरण की वजह से कंपनी पीढी-दर-पीढी टोलटैक्स वसूलती रहेगी। आज जरूरत हैं ऐसे अधिकारियो के खिलाफ देश द्रोह का मुकदना चलाया जाए तथा उनके वेतन पेंशन भता रोक दिया जाए जिससे आर्थिक अपराध करने वालो को कडी सबक मिल सके।

नब्बे के दशक मे खराब सडक जिससे कारण डिजल पेट्रोल और समय की बरबादी होती थी । गाडियो के दुघर्टना से बचाने के लिए टोल टेक्स प्रणाली की शुरूवात की गयी । लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2013-14 में देश भर में 11 हजार 400 करोड रूपय टोल टेक्स के रूप मे प्राप्त हुआ इनमे से 9 हजार 800 करोड रूपय व्यावसायिक वाहनो से और 1600 करोड रूपय निजी वाहनो से प्राप्त हुट है। जबकि टोल नाको पर वाहनो के गुजरने के दौरान प्रतिवर्ष लगभग 88 हजार करोड रूपय की धनराशि का तेल जल जाता है। पता नही देश के अर्थ शास्त्री कब इस बात को समझेगे । और टोल टेक्स वसुलने वाले दिन दहाडते कब तक राहगिरो को लुटते रहेगे।
प्रवीण कुमार

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