उम्मीद एक नए बिहार की

प्रवीण कुमार
बिहार मे विधान सभा चुनाव होने वाले है इस विधान सभा का सत्र समाप्त हो रहा है। “अच्छे दिन आने वाले है” नारे का एक साल हो गया। मोदी सरकार ने कुछ परेशानियों के साथ अपना पहला वर्षगाठ मना लिया है। बिहार का चुनावी महाभारत शुरू हो चुका है। पार्टियां जिला प्रखण्ड ग्राम पंचायतों में अपनी उपस्थित लगातार दर्ज करने की कोशिश कर रही है। सम्भवत बिहार की राजनिती दो ध्रुर्व में बंट चुकी है । एनडीए को अपने एक साल का जबाव देना है तो दूसरी तरह समाजवाद के प्रतिक नितीश कुमार को दस साल के कार्य काल को बताना है जिसमें आधे समय भाजपा के साथ बिताये नितिश कुमार के लिए यह चुवान अग्नि परीक्षा से कम नही है. लोकसभा की करारी हार के साथ साथ माझी को मुख्यमंत्री बनाने के निर्णय से भी बाहर आना है। नितिश कुमार के लिए एक सुखद बात है कि जनता परिवार की ओर से मुख्यमंत्री के उम्मीदवार घोषित हो चुके है। अब इनके सामने टिकट बांटने की चुनौती है। हाइटेक जमाने में प्रचार कराना भी उनके लिए चुनौती से कम नही होगा हैं दूसरी तरफ राजग गठबंधन अपना चेहरा किसी को नही बनायेगा । वह प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी के चहरे पर चुनाव लडने की तैयारी कर रहा हैं। भाजपा के लिए यही अच्छा हैं यही सच्चाई है बिहार भजपा के पास नितीश कुमार के कद का कोई नेता नही हैं नाम बहुत है परन्तु चेहरा बनाने में खतरा हो सकता है।

प्रश्न पुरे देश के समाने एक ही है बिहार की तकदीर कैसे बदलेगी? कौन बदलेगा ? क्या नितीश, लालू, पासवान और सुशील मोदी तथा मंत्रीमंडल में बने मंत्री रविशंकर प्रसाद, राधा मोहन सिंह, राजीव प्रताप रूढी उपेन्द्र कुशवाहा रामकृपाल यादव गिरीराज सिंह, शाहनवाज हुसैन, नंदकिशोर यादव, मंगल पाण्डेय, प्रेम चौधरी, जीतन राम मांझी, पप्पू यादव, रंजित रंजन इत्यदी बदल पाएंगे बिहार की फिजा को। नाम और भी है वे काबिल भी है। बिहार की तकदीर बदलने बिहार के बाहर बसे पढे लिखे, काबिल और हुनरमंद और जोशीले बिहारी लौट के आएंगे । आज बिहार के सामने वही पुरानी समस्याए इतिहास बन कर बैठी है। सडक, बिजली-पानी, चिकीत्सा, संचार, उद्योग, कृषि, सिचाई, शिक्षा, परिवहन, कानुन-व्यवस्था,महिला सशक्तिकरण प्रशासन आदि को उन्नत बनाने के लिए सरकार और आम जनता केा जी तोड मेहनत करने की जरूरत है। आज गाँवों को हाईटेक करने की आवश्यकता हैं । सभी गाँवों को पक्की सडक से जोडने की आवश्यकता है। ग्रामीण विद्यालय, ग्रामीण थाने, अस्पताल ब्रॉडबैंड से जुडे इसकी जरूरत है।बिहार के ग्रामीण विद्यालय में स्मार्ट क्लास के माध्यम से पूरी दुनिया से जुड सके। बिहार केा चाहिए मेंगा हाइवे जिसमें अत्यआधुनिक बाल्वो बसे दौड सके। कई इलाकों में तो दौड भी रही है। बिहार पथ परिवहन को अत्याधुनिक के साथ साथ विश्व स्तर का बनाया जाए। बिहार में पटना के साथ साथ गया, भागलपुर, दरभगा, मुजफरपुर, बक्सर, चम्पारण आदि स्थानों को हवाई मार्ग से जोडने की आवश्यकता है। इन मार्गों पर अंर्तराज्यीय तथा गया में अंतर्राष्ट्रीय उडानो की संख्या में वृद्वि की जा सकती है। जलमार्ग के विकास की अपार सम्भावना हैं गंगा सोन नदियो के माध्यम से एक जल मार्ग विकसीत कर सकते है।

आज पुरे विश्व में योगा मनाया जा रहा है। 21 जुन योग दिवस के रूप पुरा विश्व ने बडे दम खम के साथ मनाया है। योग विश्वविद्यालय मुगेर में लगभग 1964 में स्थापना की गयी थी । डॉ अब्दुल कलाम साहेब ने मुगेर को योग सिटी की उपाधी दी थी । आज मुगेर को योग की विश्व की राजधानी बनाने की जरूरत है। शिक्षा की दृष्टि से देखे तो बिहार के पास मेधावी और उर्वरा शक्ति प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। सुपर 30 इसका जीता-जागता उदाहरण है। बिहार के छात्रो को अंग्रजी और गणित में पारंगत होने के लिए सराकार को सही दिशा देनी चाहिए। आज बिहार में उच्च शि़क्षा और शोध कार्यो को बढावा देने की आवश्यकता है। हम सब यह कह सकते है बिहार के पास सबकुछ है अब चाहिए एक राजनितिक परिपक्व दृष्टि जो कार्य करे सिर्फ बिहार के विकास के लिए, समृद्धि के लिए जो बिहार सचिवालय से लेकर जिला कलेक्टर के कार्यलाय में पार्दशिता ला सके आकंठ भ्रष्टाचार और हिंसा में डूबे बिहार को इससे मुक्त करा सके । आज देश को बिहार से नई दिशा की उम्मीद हैं ।


प्रवीण कुमार

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