आईपीएल मेरी नज़र से

अनिल कुमार
एक ऐसा खेल जो पूरी दुनिया के सर चढ़कर बोल रही है| इस खेल में लगभग दुनिया के हर एक महादेश से खिलाड़ी भाग लेता है और पूरी शक्ति व क्षमता से इस खेल में अपना प्रदर्शन दिखाने को आतुर होता है उस खेल का नाम है आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग)| यह खेल सिर्फ एक खेल नहीं एक जूनून भी है जिसमें हर खिलाड़ी अपना पूरा दमखम दिखाने के लिए तैयार रहता है|

मैंने अपने नज़र से आईपीएल के दो पहलू देखें हैं, पहला कि यह खेल कहीं खिलाड़ीयों के साथ खिलवाड़ तो नहीं कर रहा? और दूसरा कि यह कहीं खिलाड़ीयों के खेल के स्तर में इजाफ़ा तो नहीं कर रहा? मैंने दोनों बातों पर गौर किया और इस नतीजे पर पहुंचा की यह खेल दोनों ही पहलूओं पर कायम है| हम पहला पक्ष को देखें तो बात सही लगती है| एक तो खिलाड़ी अपने-अपने देश के लिए खेलते हैं| उनकी काफ़ी व्यस्त दिनचर्या होती है| पहले से ही उनके पुरे साल का कार्यक्रम घोषित होता है| अब उसमें से भी समय निकाल कर वें आईपीएल खेलते हैं| जिसमें बहुत ही तेज और दमखम लगाकर खेलने की जरूरत होती है और मैच भी इतने की प्रतिदिन होने के बावजूद लगातार एक महीने तक चलती है| ऐसे में खिलाड़ियों का शरीर कब तक साथ देगा| आखिर है तो शरीर ही ना |

दुसरे नज़रिये से देखा जाए तो कहना पड़ेगा की यह खेल यूवा वर्ग खिलाड़ियों के लिए बेहतरीन प्लेटफार्म है| उनकों यहाँ पर बड़े-बड़े खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलता है| जो खिलाड़ी सिर्फ घरेलू क्रिकेट खेलता था अब वह सीधा अपने सीनियर खिलाड़ियों के साथ-साथ विदेशी खिलाड़ियों केसाथ भी खेलता है| जिससे उनकों काफ़ी सारी बातें सिखने को मिलती है| यह सिर्फ़ आईपीएल में ही हो सकता है| मैंने देखा है कि कुछ‘ कैचेज’ ऐसे पकडे जातें है जो लगभग असम्भव ही होता है| इससे फील्डिंग के स्तर में सुधार आया है| खिलाड़ियों के फिटनेसको भी बढ़ाया है| एक तरह से कहें तो पुरे क्रिकेट के स्तर को बढ़ाया है|

आईपीएल के अबतक 8 – सीजन हो चुकें हैं जिनमें कुछ चीजों को पाया है तो कुछ कड़वी बातों को भी भुलाना पड़ेगा| आईपीएल ने रविन्द्र जाडेजा, सुरेश रैना, आर आश्विन जैसे दमदार खिलाड़ीयों को उजागर किया है तो दूसरी तड़फ मैच फिक्सिंग में पकड़े जाने के कारण एस. श्रीशंथ और चंदेला जैसे खिलाड़ियों को भी खोया है| वैसेअभीतकआईपीएलमेंबुरीचीजोंके अपेक्षा अच्छी चीजें देखने को मिली है|खैर खेल तो खेल है, खिलाड़ियों पर निर्भर करता है कि वें कैसे खेलते हैं| खेल को ऊपर ले जा रहें हैं या नीचे सब उनपर ही निर्भर करता है|

हाँलाकि खिलाड़ियों को सिर्फ खेल भावना से ही खेलना चाहिए और यह आईपीएल ने साबित भी कर दिया है| जहाँ पूरी दुनिया के खिलाड़ी एक जगह खेलते हैं, एक ही टीम में अलग – अलग देश के खिलाड़ी होते हैं पर फिर भी वें चाहतें हैं कि सिर्फ उनका ही टीम जीतें और वें जीतने के लिए जी-जान से मेहनत भी करते हैं| ये खेल भावना का ही एक उदाहरण है|

अनिल कुमार उभरते हुए लेखक हैं.

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