बीजेपी के गले की हड्डी बने मुफ़्ती

जम्मू कश्मीर में अलगावादी नेता के रूप में मशहूर मसरत आलम की रिहाई हो चुकी है. जिससे जम्मू-कश्मीर बीजेपी की उलझने बढ़ गयीं हैं, इसके बावजूद जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद जुगल किशोर शर्मा ने रविवार को कहा कि मसरत की रिहाई करने वाले सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद की फैसले से निराशा हुई है. जम्मू में बीजेपी विधायकों और मंत्रियों की अहम बैठक भी होनी तय। इस  बैठक में सरकार में उनकी सहयोगी पीडीपी के फैसलों और बयानों के उपर ही होगी।

 

मसरत की रिहाई के विरोध में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कल शनिवार और आज प्रदर्शन भी किया। मसरत पर 2010 में राज्य में हुई पत्थरबाजी की वारदातों का मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है.

दूसरी तरफ आलम ने कहा  कि ‘सरकार ने मुझ पर कोई अहसान नहीं किया है। मेरी रिहाई सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत हुई है।’ मसरत ने कहा कि ‘संबंधित अदालतों से जमानत दे दिए जाने के बाद भी’ उन्हें बार-बार लोक सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में रखा गया। अपनी रिहाई से जुड़े विवाद पर मुस्लिम लीग के नेता आलम ने कहा कि ‘अगर मेरी रिहाई पर कोई हो-हल्ला मचा रहा है, तो यह उसका सिरदर्द है।’ मसरत ने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-बीजेपी की गठबंधन सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकारें बदलने से राज्य की जमीनी हकीकत नहीं बदल जाती है। कट्टरपंथी माने जाने वाले नेता ने आगे जोड़ा, ‘मैं अभी आराम महसूस कर रहा हूं, परिवार के साथ वक्त बिता रहा हूं, यह एक साधारण रिहाई है और इसे कानूनी तरीके से ही किया गया है।’ एक सवाल के जवाब में कि क्या उनकी रिहाई अलगाववादियों और सरकार के बीच बातचीत की बहाली का संकेत है, इसपर मसरत का जवाब था कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस इस पर कोई फैसला करेगा। हम मुस्लिम लीग  फोरम (हुर्रियत कॉन्फ्रेंस) का हिस्सा हैं। वार्ता पर फोरम जो भी फैसला करेगा, मैं उसे मानूंगा।’

ब्यूरो रिपोर्ट

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