एशिया के त्रिदेव: भारत-जापान-चीन

डॉ अजय उपाध्याय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महाशक्तियों की नज़र में भारत एक उभरती एशियाई शक्ति बन चुका है और सैनिक, सामरिक एवं आर्थिक  दृष्टिकोण से भारत ने वैश्विक  स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की शानदार कोशिश भी जारी रखा है। इसका प्रभाव समय-समय पर कई यद्विपक्षिए मंचों पर देखने को मिलता है।   अभी हाल ही में रूस केकुटनीतिक प्रयास से डोक़लाम विवद को शांतिपूर्ण तरीक़े से ख़त्म कर ब्रिक्स सम्मेलन में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए- तोयेबा जैसे पाकिस्तान पोषित आतंकवादी संगठनों पर लगाम लगाने का प्रयास और म्यांमार यात्रा के बहाने चीन को भी स्पष्ट संकेत देने की भारतीय कोशिश एक सकारात्मक पहल है। बशर्ते सही रणनीति का परिचय देते हुए अन्य देशों को भी इन भारतीय हितों के लिए सहमत किया जा सकें।    वर्तमान में भारत के अलावें एशिया के दो अन्य ताक़तवर देश चीन और जापान है। शक्ति संतुलन और हितों के टकराहट की दृष्टिकोण से “चीन-जापान” और “भारत- चीन” में कई सामरिक मुद्दों पर हितों का संघर्ष जगज़ाहिर है। परन्तु जहाँ तक “भारत-जापान” की बात की जाय तो आज दोनों देशों में काफ़ी नज़दीकियाँ है। इसके पीछे अमेरिकी कूटनीति की बहुत बड़ी भूमिका रहीं है। लगातार घनिष्ट होते पारस्परिक सम्बन्धों में जापानी...