अमेरिकी चुनाव और मुसलमान: एक सोची समझी रणनीति

आदित्य कुमार गिरि डॉनल्ड ट्रम्प की मुस्लिम विरोधी रणनीति से भारत में भी कुछ लोग खुश हैं। यकीनन वे...

रोहित की आत्महत्या से उठे सवाल

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित की आत्महत्या असामान्य – बर्बर घटना है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सामान्य स्थानीय...

“देश ने लाल खोया है”

आदित्य कुमार गिरि पढ़े लिखे लोग ज्यादा निर्मम होते हैं,ज्यादा वस्तुनिष्ठ होते हैं,वस्तुस्थिति को ज्यादा तटस्थ होकर देखने वाले...

तहरीक-ए-तालिबान का बाचा खान यूनिवर्सिटी, पेशावर पर हमला

पाकिस्‍तान में आतंकवादियों ने एक बार फिर अपने नापाक इरादों को अंजाम दे दिया है। आतंकियों ने पेशावर में...

किसानों की आर्थिक बदहाली और फलस्वरूप ‘आत्महत्या’

सारदा बैनर्जी देश में किसानों की आर्थिक बदहाली और उसके परिणामस्वरूप उनकी आत्महत्या की घटनाएं पिछले दो दशकों से...

दूरदर्शन के विज्ञापनों का बदलता स्वरुप

रंजना दुबे अपितु साहित्य समाज का दर्पण है, परन्तु मौजूदा समय में विज्ञापन समाज का दर्पण बन रहा है|...

सम्पूर्ण भारतीय समाज का दर्पण दिल्ली और मुम्बई

मनोहर मनोज यह बड़ी आम किवंदती है कि भारत की सारी समृद्घि दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में दिखायी...

संविधान पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए

मनोहर मनोज 26 नवम्बर को संबिधान तिथि के बहाने संसद में हुए संविधान पर बहस में किसी ने इसका...

वंचित वर्ग को आरक्षण से नहीं सशक्तिकरण से फायदा

मनोहर मनोज वंचित वर्ग की राजनीति के परिसंवाद यानी पालीटिकल डिस्कोर्स में आरक्षण का मुद्दा पुन: तीव्रता से चर्चाएमान...