Home » राजनीति You are browsing entries filed in “राजनीति”

मेजर ध्यानचंद: भारत रत्न के बड़े हकदार

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डॉ अरुण कुमार  29 अगस्त  भारत में खेल दिवस के रुप में मनाया जाता है। उसी दिन 1905 में हॉकी के महान खिलाड़ी ध्यानचंद का जन्म हुआ था। ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है और उनके नेतृत्व में भारतीय हॉकी टीम सफलता के शिखर पर पहुंची थी इसी कारण कृतज्ञ राष्ट्र उनके जन्मदिन [...]

October 14th, 2017 | Posted in Top Story,खेल-कूद,मनोरंजन,युवा मंच,राजनीति,शासन,सामाजिक | Read More »

विकासवादी आइने में गुजरात का चुनावी दंगल

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डॉ. अजय उपाध्याय गुजरात में विगत 15 वर्षों के भाजपा शासन एवं केंद्र सरकार के पिछले तीन वर्षों के दौरान जिस प्रकार की परिस्थितियाँ उत्पन्न हुई है, उसका असर आगामी गुजरात विधानसभा चुनाव पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच लगातार घटता रोज़गार का अवसर, नोटबंदी के कारण रोज़गार [...]

October 12th, 2017 | Posted in राजनीति,राज्य,शासन | Read More »

एशिया के त्रिदेव: भारत-जापान-चीन

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डॉ अजय उपाध्याय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महाशक्तियों की नज़र में भारत एक उभरती एशियाई शक्ति बन चुका है और सैनिक, सामरिक एवं आर्थिक  दृष्टिकोण से भारत ने वैश्विक  स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की शानदार कोशिश भी जारी रखा है। इसका प्रभाव समय-समय पर कई यद्विपक्षिए मंचों पर देखने को मिलता है।   अभी हाल ही में रूस केकुटनीतिक प्रयास से डोक़लाम विवद को शांतिपूर्ण तरीक़े से ख़त्म कर ब्रिक्स सम्मेलन में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए- तोयेबा जैसे पाकिस्तान पोषित आतंकवादी संगठनों पर लगाम लगाने का प्रयास और म्यांमार यात्रा के बहाने चीन को भी स्पष्ट संकेत देने की भारतीय कोशिश एक सकारात्मक पहल है। बशर्ते सही रणनीति का परिचय देते हुए अन्य देशों को भी इन भारतीय हितों के लिए सहमत किया जा सकें।    वर्तमान में भारत के अलावें एशिया के दो अन्य ताक़तवर देश चीन और जापान है। शक्ति संतुलन और हितों के टकराहट की दृष्टिकोण से ”चीन-जापान” और ”भारत- चीन” में कई सामरिक मुद्दों पर हितों का संघर्ष जगज़ाहिर है। परन्तु जहाँ तक ”भारत-जापान” की बात की जाय तो आज दोनों देशों में काफ़ी नज़दीकियाँ है। इसके पीछे अमेरिकी कूटनीति की बहुत बड़ी भूमिका रहीं है। लगातार घनिष्ट होते पारस्परिक सम्बन्धों में जापानी प्रधानमंत्री  की हाल ही में भारत यात्रा मिल का पत्थर सिद्ध होगा। इसके कोई शक नहीं है कि इन दोनों शक्तियों की नज़दीकियाँ एशिया के शक्ति- संतुलन को भारत के पक्ष में रखेगा और विश्व शांति के लिए शुभ होगा। हालाँकि विभिन्न सुरक्षात्मक चिंताओं एवं आर्थिक प्रतिस्पर्धा के बावयुद भारत ने चीन को सदैव उचित सम्मान देने की कोशिश की है, लेकिन ड्रैगन चीन की विस्तरवादी नीति और मानसिकता के कारण दोनों के मध्य कहीं ना कहीं आज तक सम्बन्धों को सही मुक़ाम नहीं मिल सका है। इसी तरह चीन और जापान के साथ विवाद के कई वजह आज भी मौजूद है। जैसे दक्षिण चीन सागर के प्रभुत्व की बात हो या कोरियाई प्रायद्वीप में हितों के टकराहट का मुद्दा या फिर सीमा विवाद का प्रश्न। इस ”शक्ति-त्रीकोण” में प्रजातांत्रिक मूल्यों में विश्वास एवं निपुण शासन प्रणालियों  के कारण भारत की पोज़िशनिग बाक़ी के बदलें लगातार मज़बूत हुई हैं।    शुरू से हीं भारत सदैव वैश्विक शांति का अग्रदूत रहा है और विकास के मोर्चे पर अन्य एशियाई देशों के संग कंधे में कंधा मिलाकर चलने का प्रयास करता रहा है। अपने लूक ईस्ट/ ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहद भारत ने सदा से पूर्वी एशियाई देशों के विकास माडल को समर्थन दिया है और साझा सांस्कृतिक एवं धार्मिक मूल्यों के साथ अपनी उपस्थिति को दर्शाया है। इस क्षेत्र में यदि शांति एवं विकास क़ायम रहेगा, तभी एशिया की समृद्धि सम्भव है और इससे भारत को भी मज़बूती मिलेगी। परंतु हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियाँ और तनाव ने भारतीय चिंता को बढ़ाया है। इसी तरह पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ते आतंकवाद एवं चरमपंथियों की साज़िश से भारत काफ़ी परेशान रहा है। क्योंकि यें ताक़तें लगातार भारत को कमज़ोर करने की कोशिश में है। विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत ने इन ग़ैर-राजकीय तत्वों को प्रतिबंधित करने के लिए मोर्चेबंदी जारी रखा है। आज ज़रूरत है कि यदि भारत को एशिया की एक मज़बूत ताक़त के रूप में स्थायी भूमिका निभानी है और अपनी विशिष्ट वैश्विक पहचान क़ायम करनी है तो एक शांतिपूर्ण एशिया के निर्माण में आगे आना होगा और छोटी-बड़ी सभी देशों के साथ समानता के स्तर पर सम्बन्धों का निर्वहन करते हुए सबका साथ-सबका विकास या सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय के नैसर्गिक न्यायपूर्ण व्यवस्था के निर्माण के लिए प्रयासरत रहना होगा।   विश्व फलक पर विशिष्ट पहचान क़ायम करने की भारत की विदेश नीति निरंतरता के साथ सदैव परिवर्तन के दौर से गुज़री है। अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सद्भाव के साथ एक प्रजातांत्रिक विश्व व्यवस्था को स्थापित  करना भारत की सैद्धांतिक एवं दूरगामी सोंच है। परंतु विगत कुछ वर्षों में विदेश नीति के केंद्र में राष्ट्रीय सुरक्षात्मक ज़रूरतों की अहमियत के साथ-साथ विश्वमंच पर एक शक्ति के रूप में अपनी पहचान क़ायम करना भारत की आवश्यकता है। इस संदर्भ में वैश्विक राजनीति और कूटनीति के स्तर  पर भारतीय नीति निर्माताओं के लिए एक ओर जहाँ कई सामयिक चुनौतियाँ विद्यमान है, यथा- मज़बूत पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान से लगातार मिल रहें बाह्य सुरक्षा का ख़तरा, बढ़ती आतंकवादी वारदाते, आर्थिक गिरावट के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार गिरती साख का संकट आदि-आदि। वही दूसरी ओर विदेश नीति के संचालन में ऐतिहासिक रूप से सामाजिक-सांस्कृतिक धरातल पर सम्बद्ध देशों को एक साझा सरोकार के साथ जोड़कर रखना आज बड़ा प्रश्न हैं। यद्यपि विश्व फलक पर भारत ने निरंतर अपनी पहचान क़ायम करने का प्रयास जारी रखा है और इस बावत भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा लगातार विदेशी दौरा जारी है, परन्तु आंतरिक स्तर पर बिना आर्थिक मज़बूती और कोई ठोस कार्यवाही के अन्य देशों के मन मस्तिष्क में भारत के लिए सार्थक लाभ प्राप्त करना मुश्किल है।     (लेखक एसोसिएट प्रोफ़ेसर एवं अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार है) 

September 9th, 2017 | Posted in Top Story,अंतर्राष्ट्रीय,राजनीति,विचार,शासन | Read More »

राष्ट्रपति चुनाव में अपने-अपने दावँ एवं दावे

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डॉ. अजय उपाध्याय विश्व के सर्वाधिक बड़े प्रजातांत्रिक देश भारत में सर्वोच्च गणतांत्रिक पद राष्ट्रपति के चुनाव की तैयारी काफ़ी ज़ोर-शोर से जारी है। देश के दो परस्पर धूर विरोधी गठबंधनों ने  अपने-अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार रखा है। एक ओर जहाँ भाजपा के नेतृत्ववाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से बिहार के [...]

July 7th, 2017 | Posted in राजनीति | Read More »

मोदी सरकार के दो साल

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मनोहर मनोज  राजनीतिक मामलों में आदर्शविहीन, कर्यक्रम योजनाओं के मामलों में बेहतरीन, बैंकिंग वित्तीय मामलों में विफल, मौलिक सुधारों के मामलों में यथास्थिति, वादे अमली के मामले में लचर पर विदेशी मामलों में अव्वल। यही है नरेन्द्र मोदी नीत एनडीए-2 सरकार के पिछले दो साल के समूचे प्रदर्शनों का पूरा आईना। . जब भी किसी [...]

June 10th, 2016 | Posted in राजनीति | Read More »

युवाशक्ति का महाउद्घोष – भाग 1

Manohar-Manoj

मनोहर मनोज आज युवा शक्ति का सर्वत्र उद्घोष ही नहीं बल्कि महा उद्धघोष हो रहा है। परिवारों में, समाज में, मार्केट में, फिल्मी दुनिया में, राजनीति में हर जगह इस वर्ग की दुहाईका मानों एक स्वर्ण काल आभासित हो रहा है। युवा वर्ग की जरूरत, रूचि और पसंद के हिसाब से मार्किट में तमाम प्रोडक्ट [...]

February 7th, 2016 | Posted in युवा मंच,राजनीति | Read More »

सीबीआई ने यादव सिंह को किया गिरफ्तार

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भ्रष्टाचार के मामले में नोएडा के अरबपति चीफ इंजीनियर यादव सिंह को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। यादव सिंह पर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप है। यादव सिंह पर आय से अधिक संपत्ति जमा करने का मुकदमा दर्ज हुआ था. इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है.   कहा जा रहा है कि [...]

February 3rd, 2016 | Posted in Top Story,अर्थव्यवस्था,राजनीति,राज्य,शासन,सामाजिक | Read More »

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ का निधन

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पूर्व कांग्रेस नेता और लोकसभा अध्यक्ष रह चुके बलराम जाखड का बुधवार को निधन हो गया, वे 92 साल के थे। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ का जन्म 23 अगस्त, 1923 को तत्कालीन पंजाब के फिरोजपुर जिले के पंचकोसी ग्राम में हुआ था। उनका परिवार मूलत: राजस्थान का रहने वाला था.   बलराम जाखड़ पहली [...]

February 3rd, 2016 | Posted in Top Story,राजनीति,राज्य,शासन,सामाजिक | Read More »

कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए लिंग जांच होनी चाहिए : मेनका गांधी

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केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा है भ्रूण लिंग परीक्षण पर रोक की बजाय सरकार को इसे अनिवार्य  करना चाहिए ताकि गर्भ में पल रहे बच्चे की ठीक से मॉनिटरिंग हो सके।हालांकि उन्होंने कहा कि यह उनके निजी विचार है और इस पर चर्चा की जानी चाहिए। मेनका गांधी सोनोग्राफी सेंटर्स द्वारा [...]

February 2nd, 2016 | Posted in Top Story,अंतर्राष्ट्रीय,युवा मंच,राजनीति,राज्य,विकास,विचार,शासन,शिक्षा,सामाजिक,स्वास्थ्य | Read More »

अमेरिकी चुनाव और मुसलमान: एक सोची समझी रणनीति

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आदित्य कुमार गिरि डॉनल्ड ट्रम्प की मुस्लिम विरोधी रणनीति से भारत में भी कुछ लोग खुश हैं। यकीनन वे लोग मैच्योर तो नहीं हैं। अमेरिका ईसाई मुल्क है। वे ऐसे भी सचेत और कट्टर हैं फिर ट्रम्प यह सब क्यों और किसके लिए कर रहे हैं। आखिर उनकी इस रणनीति का सम्बन्ध किससे है ? [...]

January 31st, 2016 | Posted in Top Story,अंतर्राष्ट्रीय,अर्थव्यवस्था,युवा मंच,राजनीति,विचार,शासन,सामाजिक | Read More »

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