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बहादुर पटेल की कविताएं

BP4

 (1) अनगिन तुम ना एक ऐसा फूल हो जिसमें कई फूलों का रंग कई की गंध समेटे हो कभी सूरज मुखी के फूल सी निहारती हो कभी ऐसे बिखरती हो कि समेटना मुश्किल हो जाता है कभी रातरानी के फूल सी चंपा और चमेली अनगिनत में एक हो कौन सी रंगत में कब उतर आओ कभी [...]

January 31st, 2016 | Posted in Top Story,अध्यात्म,नारी - सशक्तिकरण,फिल्म,मनोरंजन,युवा मंच,विचार,शासन,शिक्षा,संस्कृति,सामाजिक,साहित्य | Read More »

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

HRD4

January 26th, 2016 | Posted in Top Story,अंतर्राष्ट्रीय,अध्यात्म,अर्थव्यवस्था,खेल-कूद,नारी - सशक्तिकरण,पर्यावरण,पर्सनल फायनेंस,फिल्म,मनोरंजन,युवा मंच,राजनीति,राज्य,विकास,विचार,शासन,शिक्षा,संस्कृति,सामाजिक,साहित्य,स्वास्थ्य | Read More »

दूरदर्शन के विज्ञापनों का बदलता स्वरुप

DDN

रंजना दुबे अपितु साहित्य समाज का दर्पण है, परन्तु मौजूदा समय में विज्ञापन समाज का दर्पण बन रहा है| मौजूदा भूमंडलीय प्रक्रिया में बाजारवाद के चलते आज विज्ञापन की दुनिया इतनी बहुआयामी और प्रभावी हो गईं है कि वह व्यक्ति के जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है | यहाँ तक की व्यक्ति [...]

January 18th, 2016 | Posted in Top Story,अर्थव्यवस्था,नारी - सशक्तिकरण,फिल्म,मनोरंजन,युवा मंच,राजनीति,विचार,शासन,शिक्षा,संस्कृति,सामाजिक,साहित्य | Read More »

बेगानी शादी में मीडिया है दिवाना

Shahi

आखिरकार शाहिद कपूर और मीरा राजपूत की शादी हो गई है औऱ पिछले कुछ दिनों से मीडिया पर इसको लेकर हो रही महाकवरेज का भी अंत हुआ। चैनलों की कवरेज देख कर ऐसा लग रहा था कि देश की ये सबसे बड़ी घटना है और इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर कवर किया गया। इस तरह के [...]

July 7th, 2015 | Posted in Top Story,फिल्म,मनोरंजन,युवा मंच,सामाजिक | Read More »

तुसाद में “मोमी” हुईं कटरीना

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लंदन के मशहूर म्यूजियम मैडम तुसाद में कैटरीना ने मोम की अपनी प्रतिमा का अनावरण किया और वह लोकप्रिय मोम की प्रतिमा के संग्रहालय के बॉलीवुड के 15 वर्ष समारोह का हिस्सा बन गईं. मोम में ढली कटरीना बनकर तैयार हुई है करीब एक करोड़ 40 लाख रुपए में. मोम के पुतले की फिगर बनाने [...]

March 28th, 2015 | Posted in Top Story,अंतर्राष्ट्रीय,नारी - सशक्तिकरण,फिल्म,मनोरंजन,युवा मंच,राज्य,विचार,संस्कृति,सामाजिक | Read More »

क्या संत वैलेंटाइन से कम हैं दशरथ मांझी !

Raj

आज दशरथ मांझी बड़ा नाम है बिहार का।  बहुत बड़ा नाम है दशरथ मांझी का मेरी नजरों में।  ना केवल बड़ा बल्कि पवित्र भी, उत्साहवर्धक भी, सभ्य भी और सामाजिक और पारिवारिक  संस्कार से लबरेज भी. किसी भी पत्नी को  ऐसे प्रेम प्रदर्शन और उसकी आपूर्ति पर नाज होगा, उसके खिलाफ न तो कोई खाप खड़ा होगा, ना [...]

February 27th, 2014 | Posted in Top Story,अंतर्राष्ट्रीय,अध्यात्म,नारी - सशक्तिकरण,फिल्म,युवा मंच,राज्य,विचार,शासन,शिक्षा,संस्कृति,सामाजिक,साहित्य | Read More »

जब आपकी लॉटरी लग जाए !

susu

p v subramnayam इंसान की किस्मत कब और कहां बदल जाए कोई नहीं जानता। बिहार के एक छोटे से गांव मेें रहने वाले सुशील कुमार ने क्या कभी सोचा था कि वे अपने जीवन काल में कभी पांच करोड़ रुपये की राशि देख भी पाएंगे? निम्न मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाला यह नौजवान कौन [...]

December 4th, 2011 | Posted in Top Story,अंतर्राष्ट्रीय,अर्थव्यवस्था,खेल-कूद,फिल्म,मनोरंजन,युवा मंच,राज्य,विचार,संस्कृति,सामाजिक | Read More »

मैं तुम्हारा प्रेमी तलाश करता हूँ तुम्हें ……

Dinesh-Kumar-singh

दिनेश कुमार सिंह मैं तुम्हारा प्रेमी तलाश करता हूँ तुम्हें उन सड़कों पर जहाँ तुम पत्थर तोडा करती थी लगता था जैसे कोई कलाकार अपनी प्रेयसी की मूर्ती बना रही हों मैं तुम्हारा प्रेमी तलाश करता हूँ तुम्हें उन जगहों पर जहाँ तुम भोर में बैठकर बर्तन साफ़ करती थी लगता था जैसे कहीं दूर [...]

June 20th, 2011 | Posted in नारी - सशक्तिकरण,फिल्म,युवा मंच,विचार,संस्कृति,साहित्य | Read More »

हमें राजेंद्र प्रसाद जैसा व्यक्तित्व पैदा करना होगा: नीतू चंद्रा

nitu-chandra

  (वह शोख है, वह चंचला है, वह साहसी और निडर भी है। उसमें सामर्थ्य है प्रतिकुल परिस्थितियों में लगातार लड़ते रहने की और सफ़लता के नये कीर्तिमान स्थापित करने की। वह बिहार की बेटी है, इसलिये उसमें अक्खड़ता भी है और बिहारी संस्कृति की छाप भी। उसके रग-रग में बिहार बसा है। वह बिहार [...]

June 2nd, 2011 | Posted in फिल्म,मनोरंजन,संस्कृति | Read More »

‘सारा बजट तो सितारों पर खर्च करना पड़ता है’

amir

मोटे तौर पर यह कहानियों का दशक रहा है। इस दौरान दर्शकों की तरफ से नई और अलग तरह की सामग्री की मांग आई और इसी मांग ने इन कहानियों को सफल बना दिया। ऐसी फिल्में जो अलग हटकर थीं, जो कुछ कहती थीं, दिलचस्प ढंग से कहती थीं, जो लीक से हटकर थीं, वे [...]

May 12th, 2011 | Posted in फिल्म,मनोरंजन,साहित्य | Read More »

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