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दक्षिण अफ्रीका में गिरमिटिया का 157 वर्ष

आज 16 नवम्बर को भारतीय गिरमिटिया श्रमिकों को दक्षिण अफ्रीका में 157 वर्ष पुरे हो चुके हैं, उन्होंने अपने लगन और परिश्रम से जो बीज वहां बोये वो आज वहां खूब पुष्पित, पल्ल्वित और सुगन्धित हो रहा है. भारतीय आज वहां अपने देश की संस्कृति और सभ्यता के साथ सफलता के सोपान को छू रहे [...]

November 16th, 2017 | Posted in Top Story,अंतर्राष्ट्रीय,विचार,शासन,संस्कृति,सामाजिक | Read More »

Wisdom Blow के सभी साथियों को दीपावली की शुभकामनायें

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October 19th, 2017 | Posted in अध्यात्म,शासन,संस्कृति | Read More »

रंजीत कुमार की कविताएं

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1. हाथ से न उठाना तुम  अब तक मुगालते इश्क़ में था आज टूटकर बिखरा हूँ मैं, हाथ से न उठाना तुम काँच का टुकड़ा हूँ मैं। जो मुझसे इश्क की चाह रखते हो झुक कर होठों से उठा लो मुझे, दर्द अगर मेरा तुम्हें भी सालता हो अपनी आँखों में आँसू सा सजा लो मुझे। [...]

June 8th, 2016 | Posted in शिक्षा,संस्कृति,साहित्य | Read More »

अम्बर कुमार चौधरी की कविताएँ

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****फूलमंडी****                       एक ऐसी जगह जहाँ होता है फूलों का सौदा एक, दो, तीन या चार नहीं कई – कई जाति के फूलों का बाज़ार यह वही फूल हैं जो अपने – अपने निवास स्थान में पत्तियों और टहनियों के बीच एक मधुर मुस्कान खिलाती है यह वही फूल हैं जिन्हें खुद पता नहीं [...]

March 12th, 2016 | Posted in संस्कृति,साहित्य | Read More »

सब ठाठ धरा रह जायेगा

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 उदय प्रकाश तू आया है, तो जायेगा हम रोटी–भात खायेगा। तू लोहा–सोना खोदेगा हम खेत में नागर जोतेगा। तू हीरा-पन्ना बेचेगा हम गाछ पे पानी सींचेगा। तू सेल्फी फोटू खींचेगा हम फटा-चिथन्ना फींचेगा। तू पुलिस फ़ौज संग नाचेगा हम पोथी-पन्ना बांचेगा। तू ऊपर चढ़ इतरायेगा हम नीचे से मुसिकायेगा। तू सरग-नसैनी धायेगा हम सागर बन [...]

February 22nd, 2016 | Posted in शिक्षा,संस्कृति,साहित्य | Read More »

ध्रुव गुप्त की मर्मस्पर्शी कवितायेँ

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एक बार फिर माँ सरसो के खेतों से गुज़र रहा था थका-हारा कि पौधों ने पकड़ लिए पांव कहा – बैठो न दादा दो पल कोई जल्दी है ? मैंने थोड़ी जगह बनाई और लेट गया दो खेतों की मेड़ के बीच कुछ देर बातें की हरी पत्तियों पीले-पीले फूलों से और फिर आंखें मूंद [...]

February 5th, 2016 | Posted in Top Story,पर्यावरण,मनोरंजन,युवा मंच,विचार,शासन,शिक्षा,संस्कृति,सामाजिक,साहित्य | Read More »

बहादुर पटेल की कविताएं

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 (1) अनगिन तुम ना एक ऐसा फूल हो जिसमें कई फूलों का रंग कई की गंध समेटे हो कभी सूरज मुखी के फूल सी निहारती हो कभी ऐसे बिखरती हो कि समेटना मुश्किल हो जाता है कभी रातरानी के फूल सी चंपा और चमेली अनगिनत में एक हो कौन सी रंगत में कब उतर आओ कभी [...]

January 31st, 2016 | Posted in Top Story,अध्यात्म,नारी - सशक्तिकरण,फिल्म,मनोरंजन,युवा मंच,विचार,शासन,शिक्षा,संस्कृति,सामाजिक,साहित्य | Read More »

सोलह श्रृंगार

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ब्रह्माकुमार राम लखन विभिन्न श्रंगार और अलौकिक ड्रेसेज़ से परमपिता ने हम ब्राह्मण कुल भूषण आत्माओं को सजाया है। तिस पर भी कोई-कोई बच्चे मिट्टी वाली पुरानी-मैली ड्रेस पहन लेते हैं। कभी विश्व कल्याणी, कभी मास्टर सर्वशक्तिवान, कभी स्वदर्शन चक्रधारी की चमकीली ड्रेस पहन सदा चमकते-दमकते रहना चाहिये। गुणों का श्रृंगार कर मस्तक, गले, कान, [...]

January 30th, 2016 | Posted in Top Story,अंतर्राष्ट्रीय,युवा मंच,राज्य,विचार,शासन,शिक्षा,संस्कृति,सामाजिक,साहित्य | Read More »

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

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January 26th, 2016 | Posted in Top Story,अंतर्राष्ट्रीय,अध्यात्म,अर्थव्यवस्था,खेल-कूद,नारी - सशक्तिकरण,पर्यावरण,पर्सनल फायनेंस,फिल्म,मनोरंजन,युवा मंच,राजनीति,राज्य,विकास,विचार,शासन,शिक्षा,संस्कृति,सामाजिक,साहित्य,स्वास्थ्य | Read More »

संसार को कल्याणमय क्रीडांगन बनाइये

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ब्रह्माकुमार राम लखन विश्व परिवार की भावना और विश्व कल्याण की कामना ही सच्ची-सच्ची राष्ट्रीयता है। जिस तरह अनेकों घरों को मिलाने से गाँव, अनेकों गाँव व शहरों को मिलाने से शहर बनता वैसे ही अनेकों देशों के समूह को विश्व कहा जाता है। सभी घर तो अलग-अलग है पर मिलने से गाँव व शहर [...]

January 19th, 2016 | Posted in Top Story,अध्यात्म,नारी - सशक्तिकरण,विचार,शासन,शिक्षा,संस्कृति,सामाजिक,साहित्य | Read More »

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